• Thu, Jan 2026

70 किलो वजन, सड़ी हुई आंतें और फिर हार्ट अटैक: इस खबर को हर माता-पिता जरूर पढ़ें

70 किलो वजन, सड़ी हुई आंतें और फिर हार्ट अटैक: इस खबर को हर माता-पिता जरूर पढ़ें

फास्ट फूड के बेहिसाब शौक... या यूं कहें कि आदत ने अमरोहा में 16 वर्षीय अहाना की जान ले ली। अधिक फास्ट फूड खाने से वजन बढ़कर 70 किलोग्राम तक पहुंचा गया, आंतें भी संक्रमित हो गईं। मुरादाबाद में आपरेशन के 20 दिन बाद फिर से हालत खराब होने पर स्वजन ने दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भर्ती कराया था। जहां उपचाराधीन अहाना को रविवार को हार्ट अटैक आया और कुछ ही पल बाद उसकी मौत हो गई।

लगातार जंक फूड खाने से नहीं मिलता हृदय को पोषण

सिद्ध अस्पताल निदेशक एवं वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डा. अनुराग मेहरोत्रा ने बताया कि किशोरी को हार्ट अटैक के कई कारण हो सकते हैं। कई बार फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया की समस्या होती है। जो खून में अधिक कोलेस्ट्राल की वजह से होती है। फिर अधिक जंकफूड के सेवन की वजह से हार्ट अटैक हो सकता है। वहीं पहले से हृदय की मांसपेशियां कमजोर हों और लगातार जंकफूड के सेवन से पोषण नहीं मिलता है। इस वजह से भी हार्ट अटैक हो सकता है।

जंक फूड में नहीं मिलता फाइबर

डायटीशियन डा. अमिषा सिंह के अनुसार, जंक फूड में मैदा से बना पिज्जा, मोमोज, चटनी, वेनेगर, नूडल्स, सब्जियां आदि बहुत लोग्रेड की होती हैं। इसके लगातार 3-4 साल सेवन की वजह से लिवर और आंत पर बुरा असर पड़ता है। आंत का अल्सर भी इसी से होता है। जंक फूड में फाइबर की मात्रा नहीं होती है।

इस वजह से मल्टी आर्गन फेल्योर तक स्थिति पहुंच जाती है। फूड क्वालिटी लो होने की वजह से सेहत खराब होती है। इसी तरह, समोसे भी अधिकतर लगातार एक ही तेल में बनते हैं। इस वजह से यह तेल भी धीमा जहर बन जाता है। इसलिए लगातार इसका सेवन भी खतरनाक होता है।

न दें बच्चों को

डाक्टरों का कहना है कि फास्ट फूड में पोषक पदार्थ नहीं होते। ऐसे में अपने बच्चों को इससे बचाएं। सप्ताह में एक बार से ज्यादा यह नहीं दिए जाने चाहिए।

एफएसडीए का नहीं नियंत्रण

फास्ट फूड की ठेलों पर घटिया सास और सामग्री मिलती हैं। ज्यादातर ठेलों पर स्वच्छता को लेकर लापरवाही होती है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन (एफएसडीए) इनकी ठीक से जांच नहीं करता।

इसलिए ज्यादा पसंद किया जाता फास्ट फूड

  • समय की बचतः ड्राइव थ्रू या मिनटों में डिलीवरी हो जाती है।
  • स्वादिष्ट और विविधताः ये खाने में अच्छे लगते हैं। उच्च चीनी, नमक और फैट के चलते।
  • यात्रा के दौरान या देर रात को खाने के साथ ही ऊर्जा देते हैं।

भारत में फास्ट फूड का मायाजाल: एक भयावह हकीकत

विषयआंकड़े / स्थितिप्रभाव का दायरा
बर्गर की खपत4.42 करोड़ ऑर्डरप्रमुख फूड डिलीवरी ऐप्स के जरिए
पिज्जा का क्रेज4.01 करोड़ ऑर्डरदो बड़े फूड ऐप्स के माध्यम से
छात्रों की भागीदारी72.4 प्रतिशतदेश के विद्यार्थी फास्ट फूड के नियमित उपभोक्ता हैं
सेवन की आवृत्ति66 प्रतिशत लोगसप्ताह में कम से कम एक बार जंक फूड खाते हैं
बाजार का आकार₹3.04 लाख करोड़इस वर्ष अब तक का देश का फास्ट फूड मार्केट

चेतावनी: प्लेट में स्वाद नहीं, 'बीमारी' परोसी जा रही है!

स्वास्थ्य संकेतक (Health Indicator)आंकड़ों की भयावहतामुख्य कारण
सालाना मौतें4.2 लाखखराब गुणवत्ता वाला भोजन और जंक फूड
हृदय रोग (Heart Disease)28% मौतों की वजहफास्ट फूड में मौजूद ट्रांसफैट और सोडियम
बीमारियों का आधार56.4% बीमारियांमैदा, अधिक तेल, चीनी और नमक का मिश्रण
डायबिटीज (Diabetes)10.1 करोड़ मरीजअल्ट्रा-प्रोसेस्ड और अत्यधिक तला हुआ खाना
बचपन पर खतरा (Obesity)2.7 करोड़ बच्चे (2030 तक)मोटापा, जिससे भविष्य में गंभीर रोगों का खतरा